
नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कड़ी फटकार लगाई है, क्योंकि ईडी ने एक शख्स को मनी लॉन्ड्रिंग केस में पहले तो गवाह बनाया और बाद में उसे ही आरोपी के रूप में कटघरे में खड़ा कर दिया। यह मामला 18.8 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़ा हुआ है।
गवाह से आरोपी तक का सफर
मांगेलाल सुनील अग्रवाल को इस मामले में कोर्ट ने बेल दे दी। एजेंसी ने अक्टूबर 2022 में इस केस में आठ लोगों को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें अग्रवाल को गवाह के तौर पर पेश किया गया था। फिर इस साल अगस्त में एजेंसी ने अग्रवाल को आरोपी के तौर पर नामित करते हुए एक और चार्जशीट दाखिल की।
कोर्ट की नाराजगी
कोर्ट ने कहा कि ऐसी असंगतियां ‘परेशान करने बाली’ हैं। अदालत ने ईडी निदेशक को दोनों जांच अधिकारियों के खिलाफ जांच करने को कहा। कोर्ट ने इसके साथ ही एजेंसी को एक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया, जिसमें किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का फैसला करते समय उसके अधिकारियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में बताया गया हो। कोर्ट ने कहा, ‘जांच रिपोर्ट आज से एक महीने के भीतर दाखिल की जानी चाहिए, जिसमें यह पता लगाया जाए कि क्या उनमें से किसी ने अपने कर्तव्यों में कोई गलती की है और दोषी अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अगर दोनों के विपरीत विचार न्यायोचित पाए जाते हैं, हालांकि यह सामान्य ज्ञान के अनुकूल नहीं है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इस अप्रिय स्थिति के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित किया जाए।’