
रायपुर । छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के इतिहास में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसके बाद सलीम राज को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया। अविश्वास प्रस्ताव कांग्रेस सरकार के समय नियुक्त वक्फ बोर्ड के सदस्यों ने पेश किया था, जिसमें गुलाम मिन्हाजुद्दीन के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।

अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई के लिए दशरथ लाल साहू को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन वक्फ बोर्ड के सदस्य रियाज हुसैन ने इस नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी। रियाज ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की बैठक नोटिस तामिली दिनांक के 15 दिन के भीतर की जा रही है, जो धारा 20 क (घ) के अनिवार्य आदेशात्मक प्रावधान का उल्लंघन है।
इसके अलावा, रियाज ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के लिए पीठासीन अधिकारी उसी विभाग का नहीं होना चाहिए। वक्फ एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि इस नोटिस के तामील होने के बाद भी कम से कम 15 दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने के लिए बैठक बुलाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इस मामले में वक्फ बोर्ड के सदस्य इमरान मेमन, फिरोज खान और फैजल रिजवी के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ता अजीमुद्दीन की रिट याचिका 1947/2023 सिविल में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 27/04/2023 की प्रति भी लगाई गई है, जिसमें आदेशित किया गया है कि याचिका के लंबित रहने के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा लिए गए सभी निर्णय उपरोक्त याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे।
वक्फ बोर्ड के नए अध्यक्ष सलीम राज के चुनाव के बाद, रियाज हुसैन ने अपनी आपत्ति में उच्च न्यायालय का हवाला देकर अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई को आगे बढ़ाना आदेश की अवमानना बताया है। उक्त आपत्तियों के बावजूद देखने वाली बात है कि पीठासीन अधिकारी मार्टिन लकड़ा अवर सचिव पशुधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन क्या निर्णय इन आपत्तियों का करते हैं।