
बस्तर |
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बड़े नक्सली कमांडर पापा राव के संभावित सरेंडर की खबर ने हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के संकल्प के चलते देशभर में नक्सल विरोधी अभियान तेज हुआ है और अब इसके ठोस परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य बेहद करीब है और इस तरह के सरेंडर इस दिशा में बड़ी सफलता हैं।
सूत्रों के मुताबिक क्या है स्थिति
विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, लंबे समय से फरार पापा राव के साथ बातचीत के बाद सरेंडर की स्थिति बनी है। उसे लेने के लिए सुरक्षा बलों की टीम इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय ठिकाने की ओर रवाना हो चुकी है। संभावना जताई जा रही है कि वह अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर सकता है और जगदलपुर में बस्तर रेंज आईजी पी. सुंदरराज के सामने सरेंडर करेगा।
नक्सल नेटवर्क का बड़ा चेहरा
करीब 25 लाख रुपये का इनामी पापा राव बस्तर के वेस्ट डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बस्तर में नक्सली गतिविधियों की कमान लंबे समय तक उसी के हाथ में रही।
उसका नाम कई बड़े हमलों में सामने आया है, जिनमें कुटरू-बेदरे मार्ग पर हुआ आईईडी ब्लास्ट भी शामिल है, जिसमें 8 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा कई एंबुश और सुरक्षाबलों पर हमलों की रणनीति में उसकी अहम भूमिका रही है।
संगठन में मजबूत पकड़
पापा राव पीएलजीए का प्रमुख चेहरा रहा है और ऑपरेशनल व रणनीतिक फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी रही है। उसका पारिवारिक जुड़ाव भी संगठन से रहा— उसकी पत्नी उर्मिला, जो पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, एक मुठभेड़ में मारी जा चुकी है।
बड़ी सफलता की उम्मीद
यदि पापा राव आत्मसमर्पण करता है, तो इसे बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाएगा। पहले ही कई बड़े नक्सली मारे जा चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं, ऐसे में उसे आखिरी सक्रिय बड़े कमांडरों में माना जा रहा था।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी इस संभावित सरेंडर को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक वार बताया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बस्तर का यह बड़ा चेहरा सच में हथियार डालता है—अगर ऐसा हुआ, तो क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगना तय है।