धमतरी में फर्जी ‘CID अधिकारी’ गिरफ्तार: स्कार्पियो, नकली आईडी और मोबाइल जब्त


धमतरी। खुद को ‘CID अधिकारी’ बताकर लोगों पर रौब झाड़ने और अवैध लाभ लेने की कोशिश करने वाले एक युवक को धमतरी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग कर रहा था और अपनी महिंद्रा स्कार्पियो पर “NATIONAL CRIME CONTROL ORG.” का बोर्ड लगाकर घूम रहा था।
पुलिस के अनुसार, असामाजिक तत्वों पर निगरानी के तहत 21 फरवरी को मुखबिर से सूचना मिली कि आमातालाब रोड स्थित श्रद्धा वेल्डिंग दुकान के पास एक व्यक्ति संदिग्ध हालत में स्कार्पियो (CG 05 AU 6136) खड़ी कर खुद को CID अधिकारी बताकर लोगों को धमका रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम टिकेश्वर नरेटी (28 वर्ष), निवासी ग्राम डांगरा, थाना दुर्गकोंदल, जिला उत्तर बस्तर कांकेर बताया। वाहन पर “VICE PRESIDENT C.G. NATIONAL CRIME CONTROL ORG. ALL INDIA” लिखा बोर्ड लगा हुआ था।
तलाशी में आरोपी के पास से दो कथित पहचान पत्र मिले, जिन पर “Crime Investigation Department” और “Crime Investigation Detective” अंकित था। प्रारंभिक जांच में दोनों आईडी कार्ड फर्जी पाए गए। वैध नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज मांगने पर आरोपी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।
कड़ाई से पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने सितंबर 2025 में फर्जी आईडी कार्ड बनवाए थे और ऑनलाइन भुगतान कर उनकी कथित वैधता बढ़वाता था। वह इन्हीं कार्डों के आधार पर टोल टैक्स से बचने और विभिन्न स्थानों पर प्रभाव जमाने की कोशिश करता था।
जब्त सामग्री:
• 02 फर्जी आईडी कार्ड
• “NATIONAL CRIME CONTROL ORG.” लिखा बोर्ड
• महिंद्रा स्कार्पियो (CG 05 AU 6136)
• iPhone 11 Pro (जियो सिम सहित)
•सैमसंग M12 (जियो व बीएसएनएल सिम सहित)


पुलिस ने बताया कि आरोपी द्वारा फर्जी पहचान बनाकर स्वयं को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने और आम लोगों को भ्रमित कर अवैध लाभ लेने का प्रयास प्रथम दृष्टया साबित हुआ है। इस मामले में थाना सिटी कोतवाली धमतरी में अपराध क्रमांक 66/2026 के तहत धारा 204, 205 और 336(3) बीएनएस के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है।
आरोपी को 21 फरवरी की रात गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही है, ताकि फर्जी आईडी तैयार करने में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके। आवश्यकता पड़ने पर धाराएं बढ़ाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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