
भिलाई। नवीन भारतीय न्याय संहिता के तहत नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन महात्मा गांधी कला मंदिर, सिविक सेंटर, सेक्टर-6 भिलाई में किया गया। इस कार्यशाला में दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एफएसएल भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, जिला अभियोजन अधिकारी दुर्ग और सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन में बताया कि नवीन भारतीय न्याय संहिता आम नागरिकों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। महिलाओं से जुड़े अपराधों को अधिक कठोर बनाया गया है और ऐसे मामलों में समयबद्ध सुनवाई का प्रावधान है। धारा 4 में सामुदायिक सेवा को शामिल किया गया है, जो दंड से न्याय की ओर एक नया दृष्टिकोण है। साथ ही तलाशी के दौरान फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है, जो न्यायालय में मान्य होगी। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक टीम का घटनास्थल पर पहुँचना अनिवार्य किया गया है।

एफएसएल अधिकारी ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से लागू नए कानूनों को एक वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। ई-कोर्ट, ई-फॉरेंसिक और ई-जस्टिस सिस्टम को समर्थन देने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रहण में सावधानी बरतनी आवश्यक है। नमूनों की पैकिंग, टाइमिंग और चैन ऑफ कस्टडी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ड्राय साल्ट में सैंपल प्रिजर्वेशन, ई-एविडेंस की फोटोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका को भी प्रमुखता दी गई।

जिला अभियोजन अधिकारी ने कहा कि बलात्कार पीड़ित के मेडिकल परीक्षण के लिए 24 घंटे की समय सीमा निर्धारित है और 12 वर्ष से कम आयु की बालिका के मामलों में माता-पिता या अभिभावक की अनुमति आवश्यक है। डॉक्टर को 7 दिन के भीतर रिपोर्ट पुलिस को देना अनिवार्य है। उन्होंने अभियुक्त के परीक्षण, चोटों के विवरण और क्वेरी के उत्तर देने की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर), उप पुलिस अधीक्षक (लाइन), रक्षित निरीक्षक दुर्ग सहित अनेक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
