

दुर्ग। दुर्ग जिले में एक आपराधिक मामले में युवक को कथित रूप से गलत तरीके से आरोपी बनाए जाने का मामला सामने आया है। रुआबांधा सेक्टर निवासी एक पिता ने जिला पुलिस कार्यालय में आवेदन देकर अपने पुत्र प्रखर चंद्राकर का नाम प्रकरण से हटाने की मांग की है। पिता का दावा है कि घटना के समय उनका बेटा दुर्ग में मौजूद नहीं था, बल्कि अपने दोस्तों के साथ असम यात्रा पर गया हुआ था।


आवेदन के अनुसार, प्रखर चंद्राकर 1 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे अपने दोस्तों शुभम साव, अंकित प्रजापति और सोनू वर्मा के साथ कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन के लिए असम रवाना हुआ था। सभी लोग काले रंग की क्रेटा कार (CG 07 CT 9997) से यात्रा कर रहे थे। उनका सफर दुर्ग से रायपुर, महासमुंद, संबलपुर होते हुए कोलकाता तक का था।


पिता ने बताया कि 2 जुलाई की शाम करीब 3 बजे सभी कोलकाता पहुंचे, जहां कालीघाट क्षेत्र स्थित होटल स्टीम के कमरा नंबर G-1 में रुके। वहां ठहरने के दौरान उन्होंने कालीघाट मंदिर, हावड़ा ब्रिज और आसपास के अन्य प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया। इसके बाद 3 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे होटल से चेकआउट कर सभी असम के लिए रवाना हो गए।


आवेदन में आगे बताया गया है कि 4 जुलाई की शाम करीब 8 बजे वे गुवाहाटी पहुंचे, जहां होटल पार्क रिवीरा के कमरा नंबर 104 में ठहरे। अगले दिन 5 जुलाई की सुबह करीब 7 बजे सभी कामाख्या माता मंदिर पहुंचे और दोपहर तक दर्शन किए। इसके बाद वे शिलांग वैली घूमने चले गए। पिता का दावा है कि उनका बेटा और उसके साथी अभी भी उसी यात्रा पर हैं।
पिता ने पुलिस से प्रखर चंद्राकर और उसके साथियों की मोबाइल टावर लोकेशन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मोबाइल लोकेशन और यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि घटना के समय उनका बेटा दुर्ग या भिलाई में मौजूद नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुत्र का न तो इस घटना से कोई संबंध है और न ही वह कथित पीड़ित को जानता है। साथ ही दोनों के बीच पहले कभी किसी प्रकार का विवाद भी नहीं हुआ।
आवेदन में पिता ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यात्रा से जुड़े दस्तावेज, होटल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन सही पाए जाते हैं, तो उनके पुत्र का नाम एफआईआर और प्रकरण से हटाया जाए। उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ बिना पर्याप्त साक्ष्य कार्रवाई न की जाए।
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रखर चंद्राकर की इस प्रकरण में कोई भूमिका है या नहीं। वहीं, पिता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।