

दुर्ग/ रायपुर।
जिले में भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से करोड़ों के स्क्रैप की चोरी का घमासान थमा नहीं है, लेकिन यहाँ कबाड़ के ‘पुष्पराज’ पुलिस और प्रशासन को ठेंगा दिखाकर बेखौफ घूम रहे हैं। कार्रवाई के डर से इन कबाड़ियों ने अब पैंतरा बदल लिया है। पहले जो खेल जिले के भीतर ही यार्डों में होता था, अब उस काली कमाई का ठिकाना सीधे बॉर्डर (सीमा) को बना लिया गया है। लोहे की कटिंग से लेकर उसके अवैध परिवहन तक का पूरा नेटवर्क अब सरहद से ऑपरेट हो रहा है।
बड़े ट्रांसपोर्टर का ‘कवच’, सुपरवाइजर का ‘कमीशन’
यह पूरा अवैध धंधा हवा में नहीं चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के एक नामी और रसूखदार ट्रांसपोर्टर के संरक्षण में यह खेल बदस्तूर जारी है। ‘रोजनामचा’ की खोजी टीम के हाथ स्क्रैप के इन पुष्पराजों की एक बेहद खुफिया लोकेशन लगी है। नंदनवन मार्ग पर स्थित अमित ढाबे को पार करते ही एक अवैध यार्ड सक्रिय है, जहाँ रोजाना 3 से 4 टन चोरी का लोहा खपाया जा रहा है।
मौके पर बुग्गी की गैंग, नरेश-अविनाश का साथ
यार्ड के भीतर का नजारा चौंकाने वाला है। मौके पर बुग्गी नाम का सरगना अपने परिवार और दोस्तों के साथ दिन-रात लोहे की काट-पीट में जुटा है। इस सिंडिकेट को मजबूती देने का काम नरेश और अविनाश नाम के गुर्गे कर रहे हैं। वहीं, बड़े ट्रांसपोर्टर का सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहकर हर टन के हिसाब से अपना कमीशन वसूल रहा है और पूरी गैंग को सुरक्षा कवच दे रहा है।
आमानाका पुलिस की ‘रहस्यमयी’ खामोशी!
इस पूरे खेल में सबसे हैरान और परेशान करने वाली बात कानून व्यवस्था की है। आँखों के सामने टनों लोहा कट कर पार हो रहा है, लेकिन आमानाका थाना पुलिस इस पूरे मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जता रही है। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस वाकई इस सिंडिकेट से अनजान है या फिर कबाड़ियों के इस ‘सिस्टम’ के आगे उसने अपनी आँखें बंद कर ली हैं?


