लगातार आपराधिक गतिविधियों पर जिलाबदर की कार्रवाई, मनीष माण्डले को एक साल के लिए 7 जिलों में प्रवेश प्रतिबंधित

दुर्ग। लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और पूर्व में की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बावजूद सुधार नहीं होने पर दुर्ग पुलिस ने मनीष माण्डले के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई की है। जिला दण्डाधिकारी, दुर्ग के आदेश के अनुसार मनीष माण्डले को एक वर्ष की अवधि के लिए दुर्ग समेत 7 जिलों की सीमाओं में बिना अनुमति प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार मनीष माण्डले निवासी नागदेवता चौक, नगपुरा, चौकी नगपुरा, थाना पुलगांव के विरुद्ध वर्ष 2013 से अब तक मारपीट के 6, छेड़छाड़ का 1 और आबकारी एक्ट का 1 प्रकरण दर्ज है। आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा समय-समय पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई और उसे गुंडा बदमाश सूची में शामिल कर निगरानी भी रखी गई।

पुलिस के मुताबिक, पूर्व में भी जिला दण्डाधिकारी, दुर्ग के आदेश दिनांक 12 नवंबर 2018 के तहत मनीष माण्डले के खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद आपराधिक गतिविधियां जारी रहने पर थाना पुलगांव पुलिस द्वारा आपराधिक अभिलेख, जरायम सूची और संबंधित दस्तावेजों के साथ जिलाबदर का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद जिला दण्डाधिकारी, दुर्ग ने 24 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5 के तहत जिलाबदर का आदेश जारी किया।

इन 7 जिलों में प्रवेश पर प्रतिबंध

आदेश के तहत मनीष माण्डले को दुर्ग, रायपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बालोद और धमतरी जिले की सीमाओं में बिना अनुमति प्रवेश नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। उसे आदेश की तिथि से एक सप्ताह के भीतर इन जिलों की सीमाओं से बाहर चले जाने और एक वर्ष तक बिना अनुमति वापस प्रवेश नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।

लगातार की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मनीष माण्डले के विरुद्ध समय-समय पर प्रतिबंधात्मक प्रकरणों में इस्तगासा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। वर्ष 2025 और 2026 में भी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। इसके बावजूद आपराधिक गतिविधियों के जारी रहने पर पुनः जिलाबदर की कार्रवाई की गई।

इस कार्रवाई में थाना पुलगांव के थाना प्रभारी गुरविंदर सिंह संधू एवं चौकी नगपुरा के उप निरीक्षक खेलन सिंह साहू की भूमिका रही। पुलिस द्वारा आपराधिक अभिलेख एवं संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ अभियोजन साक्षियों के कथन भी अभिलिखित कराए गए।

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