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दुर्ग, । ’मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’’ अभियान को प्रभावी एवं सफल बनाने के उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग द्वारा फैमिली कोर्ट के न्यायाधीशगण तथा काउंसलर्स के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक विवादों के सौहार्दपूर्ण, त्वरित एवं स्थायी समाधान हेतु मध्यस्थता एवं काउंसलिंग की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना रहा।
बैठक में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग ने वैवाहिक एवं पारिवारिक मामलों में मध्यस्थता को प्राथमिक विकल्प के रूप में अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि फैमिली कोर्ट के प्रकरणों में संवाद, समझौता एवं आपसी सहमति के माध्यम से समाधान न केवल समय और व्यय की बचत करता है, बल्कि पारिवारिक संबंधों को भी सुरक्षित रखने में सहायक होता है।
बैठक के दौरान फैमिली कोर्ट में लंबित एवं सुलह योग्य मामलों की पहचान, प्री-लिटिगेशन स्तर पर मध्यस्थता एवं काउंसलिंग को प्रोत्साहित करने, पक्षकारों को मध्यस्थता के लाभों से अवगत कराने तथा मामलों के त्वरित संदर्भन हेतु प्रभावी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। काउंसलर्स द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए तथा व्यवहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने न्यायाधीशगण एवं काउंसलर्स को निर्देशित किया कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए ’’मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0’’ अभियान के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर साकार करें, ताकि अधिक से अधिक पारिवारिक विवादों का समाधान सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सके। बैठक के पश्चात् फैमिली कोर्ट में मध्यस्थता एवं काउंसलिंग के माध्यम से मामलों के निराकरण की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किए जाने पर सहमति बनी, जिससे अभियान को व्यापक सफलता मिलने की अपेक्षा व्यक्त की गई।