रावतपुरा मेडिकल कॉलेज रिश्वतकांड: तीन डॉक्टरों समेत छह आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, करोड़ों के घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई



रायपुर।
श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) को मान्यता दिलाने के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के घूसकांड में सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में बड़ी कार्रवाई हुई। रिमांड अवधि खत्म होने पर गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब सभी आरोपी 21 जुलाई 2025 तक जेल में रहेंगे।

जिन्हें जेल भेजा गया उनमें शामिल हैं:
डॉ. मंजुप्पा सी.एन., डॉ. चैत्रा (एमएस), डॉ. अशोक शेलके, कॉलेज के निदेशक अतुल कुमार तिवारी, सतीश और रविचंद्र।


CBI ने रिमांड बढ़ाने की नहीं की मांग

CBI ने किसी भी आरोपी की रिमांड बढ़ाने का आवेदन नहीं किया, जिससे स्पष्ट संकेत मिला कि प्रारंभिक पूछताछ से एजेंसी को कई अहम सुराग प्राप्त हो चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई और प्रभावशाली नामों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला कॉलेज की मान्यता दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की रिश्वत के लेन-देन से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि पहले 1.62 करोड़ रुपये की रिश्वत की डील हो चुकी थी और अब 55 लाख रुपये की नई राशि हवाला के जरिए ट्रांसफर की गई। इस पूरे षड्यंत्र का उद्देश्य था—मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (अब एनएमसी) के निरीक्षण में अनुकूल रिपोर्ट हासिल करना।

CBI द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में उल्लेख है कि संस्थान के निदेशक अतुल तिवारी ने उदयपुर स्थित गीतांजलि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मयूर रावल से सांठगांठ कर निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की। बदले में मयूर रावल ने 25–30 लाख रुपये रिश्वत की मांग की। उन्होंने निरीक्षण की तारीख (30 जून 2025) के साथ ही टीम के सदस्यों के नाम भी पहले ही साझा कर दिए थे।


कैसे हुई रिश्वत की डील और बरामदगी

30 जून को चार सदस्यीय निरीक्षण टीम कॉलेज पहुंची, जिनमें डॉ. मंजुप्पा सी.एन. और डॉ. चैत्रा शामिल थीं। डॉ. मंजुप्पा ने हवाला ऑपरेटर के जरिए रिश्वत लेने की योजना बनाई थी और सतीश नाम के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह रकम इकट्ठा करे और डॉ. चैत्रा के हिस्से की राशि उनके पति रविचंद्र तक पहुंचाए।

CBI ने 1 जुलाई को रायपुर व बेंगलुरु में एक साथ कार्रवाई की। बेंगलुरु में छापेमारी के दौरान 55 लाख रुपये की रिश्वत की राशि बरामद हुई, जिसमें से 16.62 लाख रुपये डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्र से और 38.38 लाख रुपये डॉ. मंजुप्पा के सहयोगी सतीश से जब्त किए गए।


CBI ने अब तक की कार्रवाई में बरामद किए दस्तावेज

CBI ने विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाकर कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है और जल्द ही और नाम सामने आ सकते हैं। CBI के वकील ने कोर्ट में बताया कि यह एक संगठित भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें योजना बनाकर निरीक्षण प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी।


आगे की कार्रवाई और संभावनाएं

सूत्रों का कहना है कि जांच में अब तक जो सुराग मिले हैं, उनके आधार पर आने वाले दिनों में कई अन्य बड़े नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं। सरकारी प्रक्रिया, निरीक्षण तंत्र और मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता को चुनौती देने वाले इस मामले में CBI पूरी गहराई से जांच कर रही है।



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