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रविकांत मिश्रा
भिलाई:कप्तान साहब के दफ्तर से जारी महकमे की तबादल सूची में कटिंगबाजों के वारे न्यारे हो गए हैं. अलग-अलग में बैठे कटिंगबाज को एक ही थाना मिल गया है. ऊपर उस थाने में पहले से ही उनके गुरूजी बैठ हुए हैं. ऐसे में अब उनके दोनों हाथों में लड्डू आ गया है, इसलिए उनके लिए इस बार की लिस्ट अक्षय तृतीय (शुभ मुहूर्त) से कम नहीं रही. दरअसल ये थाना ऐसा है, लगता तो बेचारा है. लेकिन जिलेभर में पहुंचने वाले स्क्रैब की खदान है. जिनकी कहानी खुल गई. लोग उन्हीं कबाड़ियों के बारे में ही जानते हैं. शेष बेधड़ इन कटिंगबाजों की रहनुमाई पर सालों से खेप की खेप पार कर खुद और इन्हें लाल कर रहे हैं. ऐसे में जिन गुरूजी ने कटिंग बाजी की ट्रेनिंग दी. उनके साथ काम करना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है. इसके अलावा आगे जो काला-पीला करेंगे उसके भी लीक होने की संभावना नहीं रहेगी, इसलिए जामुल, सुपेला समेत कई थानों से आए कटिंगबाज़ फूले नहीं समा रहे हैं. हालांकि पिछले दिनों इसका जश्न मनाने के लिए पार्टी तो हुई लेकिन उसके रंग में भंग तब पड़ गया, जब अंगूर बेटी उनके सिर पर चढ़ गई और उनसे ऐसा तांडव करा दिया कि उन्होंने गुत्थम-गुत्थी में गुरूजी को लपेट में ले लिया.बाकि अब थाने के अंतर्गत आने वाले लोगो का तो भगवान ही मालिक है ऐसा हम इसलिए कह रहे क्योंकि गुरु के साथ साथ कटिंगबाज़ी के चेले भी थाने मे अलग अलग जगहों से आदेश के बाद कूच कर चुके है जिनके निशाने पर कोई भी आम इंसान कभी भी आ सकता है। महकमे के संगवारी कह रहे की सारे कटिंगबाजो की तो निकल पड़ी है अब दूध के साथ साथ मलाई भी यही मरेंगे।