

सत्येन्द्र बडघरे कवर्धा – कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल रेंगाखार परिक्षेत्र इन दोनों धू -धूँ कर जल रहा है जिससे कीमती पेड़ तो बर्बाद हो ही रहे हैं साथ ही वन्य जीवों पर भी इसका भारी असर पड़ रहा है वही आगजनी को रोकने के बजाय जंगल के अधिकारी अपने आंखों पर काले चश्मे चढ़कर बैठे हैं,जहां लगातार वनांचल में आग लगने की खबर सामने आ रही है तो वही अधिकारी कुंभकरण की नींद सोते नजर आ रहे हैं अब भला ऐसे में क्या होगा जब वन के रक्षक ही जंगलों की सुरक्षा न कर पाए तो आम जनता भला क्या करें, वनों की आग को रोकने के लिए शासन प्रशासन से करोड़ों रुपए बजट में आते जरूर है परंतु आखिर यह राशि कहां जाती है इसका अंदाजा जमीनी स्तर पर इन तस्वीरों को देखकर ही लगाया जा सकता है एक तरफ जहां जिले के वन विभाग के उच्च औधे पर बैठे अधिकारी मौन साधे बैठे हैं ,तो वही विभाग में बैठे कर्मचारी भी कुंभकरण की नींद सोते हुए नजर आ रहे हैं ,और भला क्यों ना हो जब ,सैंया भए कोतवाल तो अब डर कहेका, कुछ ऐसा ही नजारा इन दोनों कबीरधाम जिले के वन विभाग में देखने को मिल रहा है जहां अधिकारी से लेकर कर्मचारियों की तक सभी गांधी जी के बताएं तीनों फार्मूले को अपनाते नजर आ रहे हैं।
अब देखना यह है की क्या वन विभाग अपने इस कुंभकर्णी नींद से जात पाती है और वनों को लगातार हो रहे इस आग़जनी से सुरक्षा देने में कितनी कामयाब हो पाती है।
