
रविकांत मिश्रा । भिलाई । शहर में एक थ्री स्टार साहेब की चर्चा जोर मार रही है. महकमे के ही लोग इस बात का गणित समझने में लगे हैं कि साहेब किस्मत के धनी हैं या फिर नीयती के मारे. हांलाकि ये शोध का विषय है. नतीजा जो भी हो. लेकिन वो अपने तबादलों की वजह लेम-लाइट जरूर हैं. दरअसल इन थ्री स्टार साहेब का आठ महीने में चार बार बदली हो चुकी है. इसलिए साहेब पर एक कहावत खूब चरितार्थ हो रही है. कि वे न घर के रहे न घाट के. जिले में आमद देने के बाद थाना प्रभारी बनने के लिए और साथियों की तरह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा. आते ही टाउनशिप का एक बड़ा थाना की जिम्मेदारी मिल गई. साहेब भी खुश. लेकिन जब तक थाने को समय पाते. उनकी खुशी काफूर हो गई. उन्हें थाने से उधार एेेसे का प्रभारी बना दिया, जिसकी एबीसीडी तक नहीं पता थी. आला अफसरों का आदेश था, सो मन मारकर चले गए. इस बीच किसी तरह उन्होंने तिगड़म बिठाकर जंजाल से छुटकारा पा लिया. उन्हें दोबारा से बढ़िया थाने फिर से मिल गया. लेकिन यहां भी साहेब की किस्मत खराब थी. साहेब का अभी थाने के स्टॉफ के नाम तक याद नहीं कर पाए थे, अब दोबार उन्हें रवानगी दे दी गई.