प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग में ‘न्यायश्रुति’ एवं ‘ई-साक्ष्य’ पर विशेष प्रशिक्षण-सह-प्रस्तुतीकरण

दुर्ग, 01 अक्‍टूबर 2026 / आज के न्यायालय सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं है। गवाही डिजिटल माध्यम से दर्ज हो सकती है, उपस्थिति ऑनलाइन सुनिश्चित हो सकती है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य न्यायिक कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। इसी बदलती न्यायिक कार्यप्रणाली को समझने और उसे व्यवहार में प्रभावी ढंग से अपनाने की दिशा में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में आज ‘न्यायश्रुति एवं ई-साक्ष्य’ विषय पर विशेष प्रशिक्षण-सह-प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में आयोजित हुआ, जिसमें समस्त न्यायाधीशगण ने सहभागिता की।

Technology in Courtroom: अब सिर्फ भविष्य नहीं, वर्तमान है

नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इसी संदर्भ में कार्यक्रम में न्यायश्रुति एप्लिकेशन तथा ई-साक्ष्य के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष फोकस रखा गया। श्री प्रशांत पाराशर, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा श्री दीपक कुमार कोशले, पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में श्री रवि कुमार महोबिया, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण का उद्देश्य केवल यह बताना नहीं था कि तकनीक क्या है, बल्कि यह समझाना था कि – “इसे न्यायालयीन कार्यवाही में वास्तव में इस्तेमाल कैसे किया जाए?”

न्यायश्रुति: जब साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया डिजिटल होती है

प्रस्तुतीकरण में न्यायश्रुति एप्लिकेशन के माध्यम से साक्ष्य दर्ज करने तथा ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया गया। विभिन्न प्रक्रियाओं को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिससे न्यायिक अधिकारियों को एप्लिकेशन की कार्यप्रणाली को अधिक सरल और प्रभावी ढंग से समझने में सहायता मिली। यानी बात सिर्फ एप्लिकेशन की नहीं थी – बात थी Courtroom Workflow को Technology के साथ जोड़ने की।

E-Sakshya: डिजिटल साक्ष्य आया, अब उसकी न्यायिक यात्रा भी समझना जरूरी

कार्यक्रम में ई-साक्ष्य के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होने के बाद उसके न्यायिक कार्यवाही में उपयोग से संबंधित प्रक्रिया पर भी विस्तृत जानकारी दी गई। डिजिटल साक्ष्य से जुड़े तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, ताकि न्यायिक अधिकारी उसके उपयोग की प्रक्रिया को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझ सकें।

सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा—सवाल पूछे गए

प्रस्तुतीकरण को केवल one-way presentation नहीं रखा गया। न्यायिक अधिकारियों द्वारा विभिन्न तकनीकी एवं व्यवहारिक प्रश्न पूछे गए। इन प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा करते हुए संबंधित प्रक्रिया, संभावित व्यावहारिक परिस्थितियों और उनके समाधान से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट किया गया। यही संवाद इस प्रशिक्षण की विशेषता रहा – Technology को समझना और फिर उसे courtroom situations से जोड़कर देखना।

न्यायश्रुति और ई-साक्ष्य पर आयोजित यह विशेष प्रस्तुतीकरण न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के प्रभावी समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। इसका व्यापक उद्देश्य स्पष्ट है – “तकनीक तभी न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाती है, जब उसे सही प्रक्रिया, सही समझ और सही तरीके से न्यायिक कार्यवाही में अपनाया जाए।”

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग द्वारा न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के निरंतर क्षमता-विकास और तकनीक-सक्षम न्यायिक कार्यप्रणाली के लिए आयोजित किए जा रहे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सक्षम और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *