कोटवारी भूमि विक्रय करने वाले कोटवारों पर होगी कार्यवाही, कलेक्टर…

दुर्ग:-जिले के 51 ग्रामों के कोटवारों द्वारा उसे ग्राम सेवक के रूप में सेवा करने की शर्त पर मिली भूमि को विक्रय कर देने का मामला आने के बाद कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देश पर विक्रय शून्य घोषित कराने सिविल वाद दायर कराने की कार्यवाही हुई है। विक्रय हो चुके कोटवारी भूमि/सेवा भूमि के विक्रय निरस्त कराये जाने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश के बाद जिला कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ऐसे प्रकरणों की लगातार समीक्षा कर रजिस्ट्री शून्य घोषित कराने सिविल वाद दायर करने एवं ऐसे कोटवारों के विरुद्ध अनुशासिक् कार्यवाही करने के संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देश के बाद जिले के 06 तहसीलों के कुल 51 ग्रामों के 107 खसरे के कुल 115.71 एकड़ (46.827 हैक्टेयर) कोटवारी भूमि विक्रय पाये जाने से विक्रय निरस्त कराने 73 सिविल वाद प्रकरण दायर कर दिए गए है। साथ ही कोटवारी भूमि विक्रय करने वाले ऐसे 29 कोटवार जो अभी कोटवार पद पर बने हुए है उनके विरुद्ध अनुशासक कार्यवाही करने संबंधित राजस्व न्यायालयों में प्रकरण दर्ज कर लिये गए है जहां उन कोटवारों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई प्रारम्भ कर दी गई है। सुनवाई उपरांत उन कोटवारों के विरुद्ध नियमानुसार भू राजस्व संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
जिले के 06 तहसीलों जिसमें दुर्ग के 16 ग्रामों के 13.997 हैक्टेयर, धमधा तहसील के 05 ग्रामों के 5.760 हैक्टेयर, पाटन तहसील के 17 ग्रामों के 10.73 हैक्टेयर, भिलाई तीन तहसील के 3 ग्रामों के 5.610 हैक्टेयर, बोरी तहसील के 01 ग्राम के 0.280 हैक्टेयर तथा अहिवारा तहसील के 09 ग्रामों के 10.450 हैक्टेयर कोटवारी भूमि विक्रय होना प्रारंभिक जांच में पाया गया है जिसके विरुद्ध 73 सिविल वाद दायर हुए है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 183 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसा संव्यवहार, जिसके द्वारा कोई ग्राम सेवक अपनी सेवा भूमि में के अपने हित को विक्रय, दान, बंधक, उप पत्ते द्वारा या अन्यथा एक वर्ष से अनधिक कालावधि तक के उप पत्ते द्वारा के सिवाय अंतरित कर्म का प्रयत्न करता है, शून्य होगा। इसके साथ-साथ वर्तमान में जितने भी सेवा भूमि कोटवारों को दी गई है वह सभी खसरा नंबरों को पंजीयन के सॉफ्टवेयर में ब्लॉक करने की कार्यवाही भी की गई है ताकि भविष्य में कोई भी कोटवारी भूमि का विक्रय ना हो सके।

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