
दुर्ग। वरिष्ठ आरक्षकों के अनुसंधान संबंधी पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का समापन समारोह आज पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-6, मीलन नगर दुर्ग में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज श्री रामगोपाल गर्ग (भापुसे) एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री विजय अग्रवाल (भापुसे) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 16 जून से 20 जून 2025 तक आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य वरिष्ठ आरक्षकों को अनुसंधान की बारीकियों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण में सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक अजीत यादव एवं राकेश जोश ने विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिया।

प्रशिक्षण का फोकस:
- प्रथम सूचना पत्र (FIR) की सही तरीके से लेखन प्रक्रिया
- बीएनएस की धाराओं में कार्रवाई करने की विधि
- मारपीट, साधारण चोट, गंभीर चोट, प्राणघातक हमले जैसे प्रकरणों की प्रारंभिक जानकारी
- सड़क दुर्घटना, घायलों और मृतकों से जुड़े मामलों की विवेचना की प्रक्रिया
- चालान तैयार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करने की संपूर्ण प्रक्रिया

प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षक:
- प्रथम स्थान: आरक्षक क्रमांक 971 उत्तम कुमार देशमुख, थाना रानीतराई
- द्वितीय स्थान: आरक्षक क्रमांक 1677 बी. लक्ष्मण राव, चौकी अंजोरा
- तृतीय स्थान: आरक्षक क्रमांक 1612 श्याम सिंह राजपूत, चौकी जेवरा सिरसा
इन तीनों आरक्षकों को IG रामगोपाल गर्ग एवं SSP विजय अग्रवाल ने प्रमाण पत्र व पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही, प्रशिक्षण में मार्गदर्शन देने वाले अजीत यादव एवं श्री राकेश जोश को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

आईजी और एसएसपी का संदेश:
आईजी रामगोपाल गर्ग ने अपने उद्बोधन में वरिष्ठ आरक्षकों से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए विषयों को जिम्मेदारी के साथ लागू करें और निरंतर उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें।
एसएसपी विजय अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि वे जोश और निष्ठा से कार्य करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगले सप्ताह पुनः बुलाकर इन अधिकारियों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा।
अन्य अधिकारी रहे मौजूद:
समापन कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर, रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल व्यावहारिक ज्ञान बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि आरक्षकों की विवेचना क्षमता को भी मजबूत करने में सहायक रहा।