दुर्ग में त्योहारों को लेकर प्रशासन सख्त, पंडाल से विसर्जन तक लागू होंगे कड़े नियम


दुर्ग::अंकिता:- आगामी त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर दुर्ग जिला प्रशासन ने पंडाल, अस्थाई संरचना, झांकी, ध्वनि व्यवस्था और विसर्जन को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगरीय निकाय, पुलिस और बीएसपी के अधिकारियों के साथ सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख मार्गों पर पूर्व में जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन अनिवार्य होगा। बीएसपी की जमीन पर आयोजन के लिए बीएसपी प्रबंधन की लिखित अनुमति जरूरी होगी। वहीं, किसी भी पंडाल की अनुमति से पहले पुलिस विभाग का अभिमत लेना अनिवार्य किया गया है। रास्ता बाधित होने पर पुलिस की सहमति से वैकल्पिक मार्ग तय करना होगा। वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने पर आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
50 प्रतिशत जगह पार्किंग के लिए जरूरी
आयोजन स्थल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा पार्किंग के लिए आरक्षित रखना होगा। पार्किंग आयोजन स्थल से अधिकतम 50 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए। इसके लिए अवैध पार्किंग शुल्क वसूलने पर भी रोक रहेगी।
5 हजार वर्गफीट तक 8 CCTV अनिवार्य
सुरक्षा व्यवस्था के तहत 5,000 वर्गफीट तक के पंडाल में कम से कम 8 CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। कैमरों में न्यूनतम तीन दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखनी होगी। प्रवेश, निकास, पार्किंग, मूर्ति स्थल और मनोरंजन क्षेत्र कैमरों की निगरानी में रहेंगे।
डीजे और ध्वनि को लेकर सख्ती
प्रशासन ने व्हीकल माउंटेड DJ, एम्पलीफायर और बेस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर या साउंड बॉक्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियम तोड़ने पर उपकरण जब्त कर राजसात किए जा सकते हैं। अश्लील, आपत्तिजनक या धार्मिक उन्माद फैलाने वाले गाने और भाषणों पर भी प्रतिबंध रहेगा।
पंडाल की सुरक्षा जांच के बाद ही अनुमति
नगरीय निकाय के इंजीनियर पंडाल की संरचनात्मक मजबूती और विद्युत सुरक्षा की जांच करेंगे। प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही अनुमति दी जाएगी। बिजली कंपनी अथवा बीएसपी विद्युत विभाग से NOC और अस्थाई कनेक्शन लेना भी जरूरी होगा।
अग्नि सुरक्षा के लिए पंडाल अग्निरोधी सामग्री से बनाने, अग्निशामक यंत्र, रेत और पानी की व्यवस्था रखने तथा फायर ऑडिट कराकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मूर्तियों में POP और थर्माकोल पर रोक
पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों की स्थापना की जाएगी। POP, प्लास्टिक, थर्माकोल और केमिकल डाई के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा।
चंदा वसूली पर भी प्रशासन की नजर
आयोजन समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पूजा के लिए चंदा स्वैच्छिक होगा और प्रत्येक चंदे की रसीद देना अनिवार्य होगा। जबरन चंदा वसूली की शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विसर्जन के लिए तय किए गए मार्ग
झांकियों के विसर्जन के लिए निर्धारित मार्गों का ही इस्तेमाल करना होगा। भिलाई क्षेत्र में पावर हाउस-मुर्गा चौक-सेक्टर 9-तालपुरी चौक-ठगड़ा बांध मार्ग और दुर्ग क्षेत्र में गंजपारा-मिनीमाता चौक-पुलगांव होते हुए शिवनाथ नदी का मार्ग निर्धारित किया गया है। अन्य मार्ग से विसर्जन झांकी को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
एक विसर्जन झांकी में अधिकतम तीन वाहन—मूर्ति वाहन, झांकी वाहन और जनरेटर वाहन शामिल हो सकेंगे। वाहन सहित झांकी की अधिकतम ऊंचाई 15 फीट निर्धारित की गई है।
हथियार और पटाखे पूरी तरह प्रतिबंधित
विसर्जन यात्रा के दौरान तलवार, भाला, डंडा, नकली हथियार या अन्य अस्त्र-शस्त्र रखने पर रोक रहेगी। पटाखे चलाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में आयुध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक झांकी के साथ 8 वालंटियर्स रखना अनिवार्य होगा और केवल धार्मिक भजनों की अनुमति रहेगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित नगरीय निकाय के आयुक्त अथवा मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा आयोजन की अनुमति निरस्त की जा सकती है। कुल मिलाकर दुर्ग जिला प्रशासन ने त्योहारों के दौरान सुरक्षा, यातायात, ध्वनि नियंत्रण, स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर आयोजकों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त व्यवस्था लागू की है।

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