गौशाला योजना के बीच सड़को पर मौत तांडव,मवेशियों से टकराकर लोगो की मौत,हो रहे घायल


दुर्ग:-राहुल बारले :: छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण के लिए सरकार की योजनाओं और बढ़ते अनुदान के बीच ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर घूमते और बैठे मवेशी अब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में शाम होते ही कई सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा दिखाई देता है। अचानक सड़क पर आ जाने वाले मवेशियों से दोपहिया वाहन चालकों को संभलने तक का मौका नहीं मिलता। ऐसे हादसों में वाहन चालक गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
ऐसे ही एक मामला दुर्ग जिले के धमधा थाना क्षेत्र से निकलकर सामने आई है जंहा एक माँ और बेटा बाजार से अपने घर जा रहे थे भरनी चौक और नंदवाय चौक के बीच मे नागेश गायकवाड़ और उसकी माता चित्ररेखा गायकवाड़ की मवेशी से टकराकर गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद दोनों को उपचार के लिए शासकीय अस्पताल धमधा ले जाया गया जंहा डॉक्टरों ने महिला की हालात गंभीर होने के कारण जिला अस्पताल दुर्ग रेफेर किया,हालात की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने उसे स्पर्स हॉस्पिटल सुपेला भिलाई में भर्ती कराया है परिजनों के अनुसार अभी उन्हें ICU में रखने की बात कही है ,अब सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार गौशालाओं और गौधामों के जरिए निराश्रित गौवंश के संरक्षण की योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद अगर ग्रामीण सड़कों पर मवेशी खुलेआम घूम रहे हैं तो फिर इन योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन पर कितना पहुंच रहा है?
हाल के दिनों में कवर्धा जिले में सड़क पर बैठे मवेशी से बाइक टकराने के बाद दो युवकों की मौत की घटना भी सामने आई।
सवाल अब सिर्फ गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा का भी है।
सरकार बताए—
गौशालाओं को मिलने वाला पैसा आखिर कहां और कैसे खर्च हो रहा है?
ग्रामीण सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित मवेशियों को गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
हादसों में घायल होने वाले लोगों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या गौशालाओं और गौधामों की नियमित निगरानी हो रही है?
अगर योजनाएं सफल हैं तो सड़कों पर मवेशियों की समस्या अब तक खत्म क्यों नहीं हुई?
कागजों पर गौवंश संरक्षण की योजनाएं दिखाई दे रही हैं, लेकिन सड़कों पर मवेशियों से टकराकर घायल होते लोग एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। अब जरूरत सिर्फ घोषणा की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिसमें गौवंश भी सुरक्षित रहे और इंसानों की जान भी।

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