
दुर्ग। जिले के एक निजी विद्यालय में मंगलवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब प्रार्थना सभा के दौरान एक छात्र अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा। घटना जेआरडी स्कूल की बताई जा रही है, जहां सुबह की प्रार्थना में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक मौजूद थे। छात्र के अचानक गिरने से कुछ देर के लिए स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रार्थना सभा चल रही थी तभी छात्र को अचानक चक्कर आया और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। घटना को देखते ही स्कूल के शिक्षकों और स्टाफ ने तत्काल मौके पर पहुंचकर छात्र को प्राथमिक उपचार दिया। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए छात्र को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।स्कूल प्रबंधन के अनुसार, तेज गर्मी और बढ़ी हुई उमस के कारण छात्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। विद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्र को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना उनकी पहली प्राथमिकता थी, इसलिए तत्काल अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों ने छात्र की जांच कर आवश्यक उपचार शुरू कर दिया है।घटना की सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी भी जिला अस्पताल पहुंचे और छात्र के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों से चर्चा कर उपचार की स्थिति का जायजा लिया तथा आवश्यक निर्देश दिए। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक छात्र की हालत फिलहाल स्थिर है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते अस्पताल पहुंचा दिए जाने के कारण स्थिति नियंत्रण में है और छात्र के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है।इस घटना के बाद कुछ समय के लिए विद्यालय में चिंता का माहौल बना रहा। हालांकि स्कूल प्रबंधन ने छात्रों और अभिभावकों को स्थिति की जानकारी देकर माहौल को सामान्य किया। साथ ही अन्य विद्यार्थियों को गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी की जानकारी तुरंत शिक्षकों को देने की सलाह दी गई।स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जिले में तापमान लगातार बढ़ा हुआ है और उमस भी काफी अधिक है। ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है। अभिभावकों ने भी स्कूलों से अपील की है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए प्रार्थना सभा और अन्य बाहरी गतिविधियों के दौरान विशेष सावधानी बरती जाए।जानकारों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों के लिए पर्याप्त पेयजल, छायादार स्थान, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और मौसम के अनुसार गतिविधियों के समय में बदलाव जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल छात्र की स्थिति में लगातार सुधार बताया जा रहा है और चिकित्सकों की टीम उसकी निगरानी कर रही है। छात्र के परिजन भी अस्पताल में मौजूद हैं और डॉक्टरों से लगातार संपर्क में हैं।