
बिलासपुर । बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि एक महिला और पुरुष लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं और महिला ने आरोपी को अपना पति स्वीकार किया है, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।
मामले के विवरण
महिला ने रायगढ़ के चक्रधर नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी ने साल 2008 में शादी करने का झांसा देकर उसका यौन शोषण करना शुरू किया। महिला और आरोपी लंबे समय तक साथ रहे और उनके तीन बच्चे भी हुए। बाद में आरोपी ने महिला को छोड़ दिया, जिसके बाद महिला ने थाने में रिपोर्ट लिखाई।
हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक साथ रहने और महिला द्वारा आरोपी को पति स्वीकार करने से यह मानना मुश्किल है कि उसे धोखे में रखकर यौन संबंध बनाए गए। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।
महत्वपूर्ण बिंदु
- पीड़िता ने आरोपी को अपना पति मानकर कई दस्तावेजों में अपना नाम दर्ज कराया था।
- महिला और आरोपी के बीच लंबे समय तक शारीरिक संबंध रहे और उनके बच्चे भी हुए।
- हाई कोर्ट ने इस मामले में दुष्कर्म के आरोप को खारिज कर दिया।
फैसले का महत्व
हाई कोर्ट का यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण होगा जहां महिला और पुरुष लंबे समय तक साथ रहते हैं और उनके बीच शारीरिक संबंध होते हैं। यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि ऐसे मामलों में दुष्कर्म के आरोप को साबित करना मुश्किल हो सकता है।