तमिलनाडु में हिंदी भाषा विवाद गहराया, डीएमके ने केंद्र पर लगाया हिंदी थोपने का आरोप

तमिलनाडु । तमिलनाडु में भाषा विवाद को लेकर डीएमके और केंद्र सरकार के बीच टकराव और बढ़ गया है। डीएमके के कार्यकर्ताओं ने रविवार को कोयंबटूर के पोलाची रेलवे स्टेशन पर हिंदी में लिखे नाम पर कालिख पोत दी। वायरल वीडियो में कार्यकर्ता ‘पोल्लाची जंक्शन’ के हिंदी नाम को काला करते हुए नजर आए। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने तुरंत इसे ठीक कर दिया। इस मामले में रेलवे ने एफआईआर दर्ज कर दोषियों की पहचान कर ली है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने उनके खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

स्टालिन बोले- “तमिलनाडु हिंदी थोपने की साजिश बर्दाश्त नहीं करेगा”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य किसी भी हाल में हिंदी को थोपा जाना बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने के लिए चाहे जितनी भी आर्थिक सहायता दे, लेकिन तमिलनाडु इसे स्वीकार नहीं करेगा। स्टालिन ने जोर देकर कहा कि राज्य अपने अधिकार नहीं छोड़ेगा और तमिल समाज के अस्तित्व और भाषा की रक्षा करेगा।

भाषाओं के बीच कोई दुश्मनी नहीं : प्रधानमंत्री मोदी

वहीं, भाषा विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की भाषाएं हमेशा एक-दूसरे को प्रभावित और समृद्ध करती रही हैं। नई दिल्ली में मराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि भाषाओं के नाम पर विभाजन पैदा करने की कोशिशों को देश की साझा भाषाई विरासत ने हमेशा जवाब दिया है। उन्होंने लोगों से ऐसी ‘गलत धारणाओं’ से बचने और सभी भाषाओं को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

‘ट्राई-लैंग्वेज वॉर’ ऐसे हुआ तेज

15 फरवरी : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वाराणसी में तमिलनाडु सरकार पर शिक्षा नीति के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को समग्र शिक्षा मिशन के तहत 2400 करोड़ रुपए की राशि तभी मिलेगी जब वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह अपनाएगा।

16 फरवरी : मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र के इस रुख का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि तमिल लोग धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर राज्य को फंड से वंचित किया गया तो केंद्र सरकार को तमिलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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