Forex Reserve भर रहा भारत

RBI की जून की पहल से आया 136 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा प्रवाह, Forex Reserve पहुँचा रिकॉर्ड ऊंचाई पर


जांजगीर-चांपाविदेश में रखा एक डॉलर जब भारत की अर्थव्यवस्था की ताकत बन जाए, तो इसे केवल बैंकिंग की कहानी नहीं कहा जा सकता। RBI की विशेष पहल ने इसी विचार को जमीन पर उतारा—विदेशों में रखे डॉलर को भारत की ‘गुल्लक’ तक लाकर।

भारत की अर्थव्यवस्था में इन दिनों एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से बढ़ा है और इसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जून में शुरू की गई एक विशेष पहल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसे समझना कठिन नहीं है, यदि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एक बड़ी डॉलर वाली गुल्लक मान लिया जाए।

दरअसल, 8 जून 2026 को RBI ने एक विशेष USD-INR Forex Swap Facility शुरू की। इसका उद्देश्य विदेशों से भारत में डॉलर और अन्य विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना था। इसके तहत बैंकों को 3 से 5 वर्ष की नई FCNR(B) जमा जुटाने पर विदेशी मुद्रा की हेजिंग लागत में विशेष सुविधा दी गई। साथ ही विदेशी मुद्रा में उधारी से जुड़े कुछ अन्य माध्यमों को भी इस सुविधा में शामिल किया गया।

अब इसे बिल्कुल सरल भाषा में समझिए।

मान लीजिए भारत एक बड़ा घर है और उसके पास डॉलर की एक गुल्लक है। इस गुल्लक में निर्यात, विदेशी निवेश और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के माध्यम से डॉलर आते हैं। लेकिन दूसरी तरफ भारत को कच्चा तेल, सोना, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी विदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए लगातार डॉलर खर्च भी करने पड़ते हैं। यानी गुल्लक में डॉलर आते भी हैं और बाहर भी जाते हैं।

RBI ने जून में सोचा कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों यानी NRI के पास भी बड़ी मात्रा में डॉलर हैं। क्यों न उन डॉलर को भारत की गुल्लक में लाया जाए?

मान लीजिए अमेरिका में रहने वाले किसी NRI के पास 1 लाख डॉलर हैं। RBI की विशेष व्यवस्था से भारतीय बैंक उसके डॉलर को FCNR(B) खाते में जमा कराने के लिए बेहतर शर्तें दे सकते हैं। NRI ने डॉलर भारत में जमा किया और भारत की गुल्लक में 1 लाख डॉलर और जुड़ गए।

अब यदि हजारों-लाखों NRI ऐसा करें तो गुल्लक कितनी तेजी से भर सकती है, इसका अंदाजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है।

31 अगस्त 2026 तक इस विशेष व्यवस्था के तहत कुल करीब 136.3 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटा। इसमें अकेले FCNR(B) जमा की हिस्सेदारी लगभग 127.2 अरब डॉलर रही। इसके अलावा करीब 5.26 अरब डॉलर Overseas Foreign Currency Borrowings (OFCBs) और 3.89 अरब डॉलर External Commercial Borrowings (ECBs) के माध्यम से आए।

इसका असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया। 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का Forex Reserve करीब 45 अरब डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पहुंच गया। यह लगातार दसवां साप्ताहिक वृद्धि था।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का मतलब यह नहीं कि डॉलर की कीमत तुरंत ₹70 या ₹75 हो जाएगी। भारत को तेल और अन्य वस्तुओं के आयात के लिए लगातार डॉलर की जरूरत होती है। वैश्विक बाजार, विदेशी निवेश, निर्यात-आयात और RBI की बाजार में भूमिका—ये सभी रुपये और डॉलर की कीमत को प्रभावित करते हैं।

इसे फिर उसी गुल्लक से समझिए। गुल्लक भरना आर्थिक मजबूती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गुल्लक का सारा पैसा उसी दिन खर्च कर दिया जाए। RBI जरूरत के समय इस विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल रुपये पर अत्यधिक दबाव को कम करने और देश की बाहरी आर्थिक सुरक्षा मजबूत रखने के लिए कर सकता है।

इसलिए जून की यह पहल केवल डॉलर जुटाने की कवायद नहीं थी। इसका बड़ा उद्देश्य था— भारत की Forex Reserve को मजबूत करना, बैंकों को विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराना और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए देश की क्षमता बढ़ाना।

सरल शब्दों में कहें तो RBI ने विदेशों में रखे डॉलर के लिए भारत की गुल्लक का दरवाजा थोड़ा और खोल दिया—और नतीजा यह रहा कि कुछ ही महीनों में उस गुल्लक में 136 अरब डॉलर से अधिक की नई विदेशी मुद्रा पहुंच गई।

प्रशांत गुप्ता
तहसीलदार एवं आर्थिक विषयों के विश्लेषक

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