
उज्जैन । उज्जैन पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई में चार फर्जी एडवायजरी सेंटरों पर छापा मारा और 120 युवक-युवतियों को पकड़ा। ये युवक-युवतियां कम पढ़े-लिखे थे, लेकिन उन्हें कंपनी 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा सैलरी देती थी।
पुलिस को जब इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई की और चार अलग-अलग जगहों पर छापा मारा। जांच में पता चला कि ये सेंटर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर उनके डीमेट अकाउंट खुलवाते थे और फिर उनमें घाटा दिखाकर पैसा हड़प लेते थे।
पकड़े गए युवक-युवतियों को हर ट्रांजेक्शन पर 10 रुपये का कमीशन मिलता था। इनका मुख्य निशाना प्रदेश के बाहर रहने वाले लोग थे। सेंटर से बड़ी संख्या में मोबाइल, लैपटॉप और ग्राहकों की सूचियां बरामद की गई हैं।
इस गोरखधंधे के सरगना अजय पंवार और शशि मालवीय को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि चंदन भदौरिया और विनय राठौर फरार हैं। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का पता चला है। पुलिस की आईटी सेल अब तक की ठगी का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि हमने चार फर्जी एडवायजरी सेंटर पर छापा मारा, जहां बड़ी संख्या में नवयुवक और युवतियां काम करते हुए मिले। ये सभी लोगों को कॉल कर निवेश के नाम पर धोखाधड़ी में शामिल थे। फिलहाल 120 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
इस मामले में पुलिस ने बताया कि ये सेंटर लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देकर उनके डीमेट अकाउंट खुलवाते थे और फिर उनमें घाटा दिखाकर पैसा हड़प लेते थे। पुलिस ने बताया कि इस गोरखधंधे में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।