
दुर्ग । दुर्ग जिले में भारत-पाक युद्ध के दौरान आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल किया गया। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में तैयार करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना था।
मॉक ड्रिल के दौरान क्या हुआ?
शाम 7:30 बजे सायरन बजते ही पूरा शहर अंधेरे में डूब गया और शहर के कई इलाकों को ब्लैक आउट किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान घरों, दुकानों, ऑफिसों की लाइटें और सड़क पर चलने वाले वाहनों को रोककर हेडलाइट बंद कर दी गई। दुर्ग के सिविक सेंटर चौक, सेक्टर 9 चौक, ग्लोब चौक, 25 मिलियन चौक, इक्यूपमेंट चौक पर मॉक ड्रिल किया गया।
भिलाई इस्पात संयंत्र में भी मॉक ड्रिल
भिलाई इस्पात संयंत्र की सुरक्षा के लिए टाउनशिप में भी ब्लैक आउट किया गया। संयंत्र में जिला प्रशासन के निर्देश पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ), एसडीआरएफ, सीआईएसएफ एवं बीएसपी ने संयुक्त रूप से आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस मॉक ड्रिल में संयंत्र के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य
मॉक ड्रिल का उद्देश्य संयंत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया तैयारियों का आकलन करना, त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना और कर्मचारियों को विभिन्न आपातकालीन परिदृश्यों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना था। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया।
लोगों को जागरूक किया गया
मॉक ड्रिल के दौरान लोगों को आपात स्थिति में बचाव और लोगों को निकालने के तरीके समझाए गए। लोगों को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया, वाट्सएप ग्रुप और माइक के माध्यम से प्रचार किया गया था। लोगों को आपात स्थिति में अपने घरों में कोनों में खड़े होने या जमीन पर लेटने और लेटते समय अपने दांतों के बीच कपड़े या रुमाल दबाकर रखने एवं दोनों कानों को हाथ से ढककर रखने की अपील की गई थी।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और यह मॉक ड्रिल संयंत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से किए जाने वाले उपायों का एक हिस्सा है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने का प्रयास किया गया।