सर्वोच्च अदालत का बड़ा फैसला: पत्नी को भरण-पोषण का खर्च देना होगा, पहली शादी का मामला कोर्ट में होने पर भी

दिल्ली । सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति को दूसरी शादी में पत्नी से तलाक होने पर भी भरण-पोषण का खर्च देना होगा, यदि पहली शादी का मामला कोर्ट से नहीं सुलझाया गया है। अदालत ने कहा कि अगर दूसरी शादी में भी तलाक होता है तो पति को अपनी पत्नी की देखभाल करनी होगी।

इस फैसले के पीछे की कहानी यह है कि तेलंगाना की रहने वाली उषा रानी ने एम श्रीनिवास से 1999 में शादी की, जो उनकी दूसरी शादी थी। एक साल बाद दोनों को एक बेटा हुआ, लेकिन 2005 में दोनों को कुछ कारणों से तलाक लेना पड़ा। उषा रानी ने परिवार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी पहली पत्नी का मामला अभी भी कोर्ट में था, इसलिए उन्हें राहत नहीं मिली।

हैदराबाद हाई कोर्ट ने भी उषा रानी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद यह केस सर्वोच्च अदालत पहुंचा। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उषा श्रीनिवास को कानूनी तौर पर पत्नी का दर्जा मिला। 1999 से 2000 तक वह श्रीनिवास की पत्नी थीं और दोनों का एक बेटा था। ऐसे में कानूनी तौर पर यह कहना कि भरण पोषण देना गलत होगा, गलत नहीं है।

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