
सत्येन्द्र बडघरे कवर्धा – “जब सैया भए कोतवाल तो अब डर कहे का “ यह कहावत तो हमने सुनी थी परंतु इसकी जीवंत तस्वीर हमे कबीराधाम जिले मे देखने को मिल रहा है।

बता दें कि सरसल मामल छत्तीसगढ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री के गृह जिले का है जहां कवर्धा शहर , कवर्धा बाईपास,लोहारा,पंडरिया , पांडातराई , पिपरिया, दसरंगपुर, कुंडा, इंदौरी,रेंगाखर , कुगदुर ,कोडवागोड़न , सहित अन्य और भी शराब दुकानें संचालित है जहां लोग खुले आम चखना दुकान खोलकर बैठे हैं इनमें से कुछ दुकान तो भट्ठी परिसर पर ही संचालित किया गया है बावजूद इसके आबकारी विभाग को यह नजर नहीं आती जब कार्यवाही की बात आती है तो यह नुमाइंदे गांधी जी के बताए अनुसार तीनों फार्मूलों को अपनाते हुए नजर आते हैं सूत्रों को माने तो ज्यादातर दुकानों से विभाग के कुछ अधिकारियो के मुंह में काले गुलाब जामुन की मिठास होती है यही कारण है कि विभाग के ऊंचे ओहदे पर बैठे अधिकारियो के आखों पर काले चसमे नजर आते है , हद तो तब हो जाती है जब खादी के धारण करने वालो को भी यह सब नजर नहीं आता इतना ही नहीं ज्यादातर तो शराब बेचने वाले सेल्समैन चिल्लहर का बहाना करके बाकी रकम वापस भी नहीं करते बल्कि अगर ग्राहक रकम वापस मांगता है तो उसके साथ दादागिरी करते नजर आते है अगर कोई भी इनकी शिकायत करता है तो ये लोग मारपीट पर भी उतारू हो जाते है हाल ही में एक विडियो पिपरिया शराब दुकान से वायरल हुआ था जिसमे चल्ल्हर को लेकर ग्रामीणों से विवाद का मामला सामने आया था। अब देखना यह है कि प्रदेश के गृह मंत्री अपने गृह जिले की इस समस्या को लेकर कितने गंभीर नजर आते हैं।
