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भिलाई। दोस्तों आपने अपने पैरों पर कुल्हाली मारने वाली कहावत तो सुनी होगी. इस चरितार्थ करके महकमे के जांबाज ने अपने जिगर-बाज होेने की पोल खुद खोल डाली. महकमे में बाबू साहेब का असली काम केवल समन बांटने का है, लेकिन सिविल वर्दी में आने के बाद साहेब दूसरे रोल में नजर आने लगते हैं, घर, पड़ोसी और मोहल्ला तक तो ठीक था. ये अपनी जुमलेबाजी से लोगों को प्रभावित करने महफिलों में पहुंचने लगे. अब तक को इनका आभा मंडल ठीक-ठाक चल रहा था. इसी की बदौलत कभी-कभार मधुशाला में फ्री सेवा का आनंद उठा लिया करते थे. पिछले दिनों इसी मंशा को लेकर एक मधुशाला में पहुंच गए, जहां पहुंचकर अपने मुंह-मिट्ठू मियां बनने लगे. अंधों के बीच काना राजा बनकर खूब वाह-वाही लूट रहे थे. लेकिन इन बेड लक बस यहीं से शुरू हो गया. यहां पहले से मौजूद नारदमुनी साहेब की लफ्फाजी सुनकर सकते में आ गए. उन्हें लगा ऐसी महानात्मा के बारे में तो महकमे वालों से जानकारी लेनी ही चाहिए. थोड़ी मेहनत के बाद नारदमुनी को पता चला कि ये साहेब बहुत बड़े वाले हैं. महकमे की नौकरी में लफ्फाजी के अलावा कुछ नहीं किया. इस पर नारदमुनी को शरारत सूझ गई. उन्होंने मधुशाला में साहेब के जाते ही उनकी पोल खोल दी. ये सुनकर साहेब का नाम लेकर यही कहने लगे कि ये तो सूरमा-भोपाली निकले…