हजारों कर्मचारियों वाली नामी कंपनी को बेचकर दिवालिया घोषित करने की तैयारी? मालिकों पर विदेश में पैसा खपाने के गंभीर आरोप

दुर्ग । शहर की हजारों कर्मचारियों को रोजगार देने वाली एक नामी कंपनी को कथित रूप से बेचकर भविष्य में दिवालिया घोषित करने और कंपनी के मालिकों के विदेश चले जाने की तैयारी किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

आरोप है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा पहले भी अपनी एक फैक्ट्री बेचकर प्राप्त राशि को विदेशों में स्थानांतरित किया गया है। अब इसी कथित योजना के तहत वर्तमान कंपनी के बड़े हिस्से के शेयर बेचने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि कंपनी के लगभग 70 प्रतिशत शेयर मालिक पक्ष के पास हैं, जिन्हें अचानक बेचने की तैयारी की जा रही है। यदि कंपनी का 70% हिस्सा बिक गया तो निश्चित रूप से कंपनी के सामने बंद करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचेगा

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कंपनी से जुड़ी विभिन्न संपत्तियों पर आवश्यकता से अधिक ऋण लिया गया है तथा बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर बड़े ऋण स्वीकृत करवाए गए। आरोपों के अनुसार, कंपनी से संबंधित धनराशि को विदेशों में स्थानांतरित करने की गतिविधियां भी चल रही हैं।

कंपनी के शेयर मूल्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिस शेयर का मूल्य लगभग ₹70 था, वह कथित ट्रेडिंग गतिविधियों और अन्य माध्यमों से बढ़कर करीब ₹570 तक पहुंच गया। ऐसे में शेयर मूल्य में हुई इस वृद्धि तथा इसके पीछे की वास्तविक परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।

इसी बीच, कुछ दिन पूर्व कंपनी परिसर में संभावित खरीदारों के आने की भी चर्चा है। आरोप है कि कर्मचारियों और मजदूरों के बीच इसे निवेशकों के आने के रूप में प्रस्तुत कर उन्हें भ्रमित अथवा प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर कंपनी में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों, मजदूरों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है। सवाल यह है कि कंपनी के स्वामित्व में बड़े बदलाव, संभावित बिक्री, ऋण और संपत्तियों के हस्तांतरण की स्थिति में कर्मचारियों के हितों तथा उनके रोजगार की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के शेयर लेनदेन, प्रमोटर होल्डिंग, ऋण एवं संपत्तियों, संबंधित पक्षों के बीच हुए लेनदेन तथा विदेशों में धन के संभावित हस्तांतरण की संबंधित नियामक एवं जांच एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है।

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